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बंगाल चुनाव में विवाद EVM बटन ढकने के आरोप से मचा सियासी तूफान

Satyakhabarindia

पश्चिम बंगाल में आज दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है और इसी बीच राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय ने फलता विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि कई पोलिंग बूथों पर ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की गई है जिससे बीजेपी के पक्ष में वोट देने वाले बटन को टेप लगाकर ढक दिया गया। इस आरोप के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

अमित मालवीय का दावा कई बूथों पर वोटिंग में बाधा का आरोप

अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कथित गड़बड़ी से जुड़े तीन वीडियो भी साझा किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को अपनी पसंद के उम्मीदवार और पार्टी को वोट देने में जानबूझकर कठिनाई पैदा की जा रही है। उनके अनुसार यह घटना विशेष रूप से डायमंड हार्बर के फलता विधानसभा क्षेत्र में सामने आई है जहां तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी नेता ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ गंभीर मामला बताया है और तत्काल जांच की मांग की है।

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किन बूथों पर गड़बड़ी का आरोप सामने आया

अमित मालवीय ने जिन मतदान केंद्रों का उल्लेख किया है उनमें फलता 144 पार्ट 170 रूम नंबर 2 और हरिणडांगा हाई स्कूल का बूथ शामिल है। इसके अलावा बूथ संख्या 189 को भी इस तरह की कथित गड़बड़ी से प्रभावित बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि इन बूथों पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ कर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। हालांकि अब तक इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित चुनाव अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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चुनाव आयोग और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार माहौल में बढ़ा तनाव

इस पूरे मामले पर अभी तक पश्चिम बंगाल सरकार या चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मतदान के बीच इस तरह के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। पहले से ही हाई वोटिंग और कड़े मुकाबले के बीच यह विवाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या किसी तरह की जांच शुरू की जाती है या नहीं। यह मामला चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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